PMCH में कैंसर मरीजों की बढ़ती संख्या ने बढ़ाई चिंता, रोजाना 30 से ज्यादा मरीज पहुंच रहे इलाज के लिए

On: May 23, 2026 4:02 PM
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PMCH: पटना से सामने आई एक खबर ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। कभी गिने-चुने कैंसर मरीजों का इलाज करने वाला पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल यानी PMCH अब लगातार बढ़ते मरीजों के दबाव का सामना कर रहा है। अस्पताल में कैंसर के मामलों में अचानक आई तेजी ने डॉक्टरों और प्रशासन दोनों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। हालत यह हो गई है कि जहां पहले रोजाना सिर्फ 7 से 8 मरीज कैंसर इलाज के लिए पहुंचते थे, वहीं अब हर दिन 30 से ज्यादा मरीज OPD में पहुंच रहे हैं।

पिछले एक महीने में मरीजों की संख्या में चार गुना से ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह आंकड़ा सिर्फ अस्पताल के लिए ही नहीं बल्कि समाज और स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए भी गंभीर संकेत माना जा रहा है। लगातार बढ़ते मामलों ने यह साफ कर दिया है कि कैंसर जैसी बीमारी अब तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रही है।

अस्पताल पर बढ़ा दबाव

PMCH बिहार का एक बड़ा सरकारी अस्पताल माना जाता है, जहां दूर-दराज के इलाकों से लोग इलाज के लिए आते हैं। लेकिन कैंसर मरीजों की अचानक बढ़ी संख्या ने अस्पताल की व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया है। डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को लगातार ज्यादा मरीजों को संभालना पड़ रहा है।

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कई मरीज ऐसे भी हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और निजी अस्पतालों में इलाज कराने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे में PMCH ही उनके लिए सबसे बड़ा सहारा बनकर सामने आता है। मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण अस्पताल प्रशासन अब कैंसर वार्ड में बेड बढ़ाने की तैयारी कर रहा है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को समय पर इलाज मिल सके।

कैंसर के बढ़ते मामलों ने बढ़ाई चिंता

कैंसर को हमेशा से गंभीर बीमारी माना जाता रहा है, लेकिन अब जिस तेजी से इसके मामले बढ़ रहे हैं, उसने लोगों के बीच डर और चिंता दोनों बढ़ा दिए हैं। डॉक्टरों का मानना है कि खराब जीवनशैली, प्रदूषण, तंबाकू और अनियमित खानपान जैसी कई वजहें कैंसर के मामलों को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही हैं।

आज के समय में लोग काम के दबाव और भागदौड़ भरी जिंदगी में अपने स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर देते हैं। कई बार शुरुआती लक्षणों को सामान्य समझकर लोग इलाज में देर कर देते हैं, जिससे बीमारी गंभीर रूप ले लेती है।

PMCH में लगातार बढ़ते मरीजों की संख्या इस बात का संकेत है कि लोगों को अब अपनी सेहत को लेकर ज्यादा सतर्क होने की जरूरत है।

कैंसर वार्ड में बढ़ेंगे बेड

मरीजों की संख्या बढ़ने के बाद अस्पताल प्रशासन ने कैंसर वार्ड में सुविधाएं बढ़ाने की दिशा में कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार कैंसर वार्ड में बेड की संख्या बढ़ाई जाएगी ताकि मरीजों को बेहतर इलाज और सुविधा मिल सके। अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि लगातार बढ़ती भीड़ को देखते हुए संसाधनों को बढ़ाना बेहद जरूरी हो गया है। अगर समय रहते सुविधाओं का विस्तार नहीं किया गया, तो मरीजों को इलाज में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। यह कदम मरीजों और उनके परिवारों के लिए राहत भरा साबित हो सकता है, क्योंकि कई बार बेड की कमी के कारण मरीजों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है।

ग्रामीण इलाकों से भी पहुंच रहे मरीज

PMCH में इलाज के लिए सिर्फ पटना ही नहीं बल्कि बिहार के अलग-अलग जिलों और ग्रामीण इलाकों से भी मरीज पहुंच रहे हैं। कई मरीज ऐसे होते हैं जिन्हें शुरुआती स्तर पर बीमारी का पता ही नहीं चल पाता। जब हालत ज्यादा खराब होने लगती है, तब वे बड़े अस्पताल का रुख करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और जागरूकता का अभाव भी एक बड़ी वजह मानी जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर लोगों को समय रहते जांच और सही जानकारी मिले, तो कैंसर जैसी बीमारी का इलाज शुरुआती चरण में आसान हो सकता है।

जागरूकता की जरूरत पहले से ज्यादा

विशेषज्ञों का मानना है कि कैंसर के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए जागरूकता सबसे बड़ा हथियार है। लोगों को नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित खानपान और नशे से दूरी जैसी बातों को गंभीरता से अपनाने की जरूरत है। कई लोग अभी भी कैंसर के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। यही वजह है कि बीमारी धीरे-धीरे गंभीर हो जाती है। अगर समय पर जांच हो जाए, तो इलाज की संभावना काफी बेहतर हो सकती है। PMCH में मरीजों की बढ़ती संख्या समाज को यह संदेश भी दे रही है कि अब स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही भारी पड़ सकती है।

परिवारों पर भी पड़ रहा असर

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कैंसर सिर्फ मरीज को ही नहीं बल्कि पूरे परिवार को मानसिक और आर्थिक रूप से प्रभावित करता है। इलाज लंबा और महंगा होने की वजह से कई परिवारों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। सरकारी अस्पतालों में इलाज की सुविधा मिलने से गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को कुछ राहत जरूर मिलती है, लेकिन मरीजों की बढ़ती संख्या स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती बनती जा रही है।

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