Patna Junction में मोबाइल चोरी के बाद खाते से उड़ गए 4.50 लाख रुपये, साइबर ठगों के नए तरीके ने बढ़ाई लोगों की चिंता

On: June 14, 2026 1:17 PM
Patna Junction

Patna Junction: आज के डिजिटल दौर में मोबाइल फोन केवल बातचीत का साधन नहीं रह गया है। इसमें हमारी बैंकिंग जानकारी, व्यक्तिगत दस्तावेज, सोशल मीडिया अकाउंट और कई महत्वपूर्ण जानकारियां मौजूद रहती हैं। ऐसे में अगर मोबाइल फोन चोरी हो जाए तो नुकसान केवल डिवाइस तक सीमित नहीं रहता, बल्कि बैंक खाते तक भी पहुंच सकता है। बिहार की राजधानी पटना से सामने आया एक ऐसा ही मामला लोगों को सावधान रहने का बड़ा संदेश दे रहा है।

पटना जंक्शन इलाके में एक व्यक्ति का मोबाइल फोन चोरी हो गया और इसके बाद साइबर अपराधियों ने उसके बैंक खाते से लाखों रुपये निकाल लिए। इस घटना ने न केवल पीड़ित को आर्थिक नुकसान पहुंचाया बल्कि यह भी दिखा दिया कि साइबर ठग अब कितने संगठित और तकनीकी रूप से सक्रिय हो चुके हैं। घटना के बाद पुलिस और साइबर सेल मामले की जांच में जुट गई है।

पटना जंक्शन में हुई मोबाइल चोरी

जानकारी के अनुसार करबिगहिया निवासी धीरज कुमार किसी जरूरी काम से पटना जंक्शन पहुंचे थे। स्टेशन परिसर और उसके आसपास हमेशा की तरह काफी भीड़भाड़ थी। इसी दौरान किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनकी जेब से मोबाइल फोन चोरी कर लिया। शुरुआत में उन्हें केवल मोबाइल गायब होने की चिंता थी, लेकिन आने वाले कुछ घंटों में यह मामला कहीं ज्यादा गंभीर साबित हुआ।

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मोबाइल नहीं मिलने के बाद धीरज कुमार ने तुरंत पटना जंक्शन जीआरपी थाने में शिकायत दर्ज कराई। उन्हें उम्मीद थी कि शायद फोन बरामद हो जाए, लेकिन अपराधियों की नजर केवल मोबाइल पर नहीं बल्कि उसमें मौजूद महत्वपूर्ण जानकारियों पर भी थी।

नया सिम लेते ही सामने आया बड़ा झटका

मोबाइल गुम होने के बाद धीरज कुमार ने नया मोबाइल और नया सिम कार्ड लेने का फैसला किया। जब नया सिम सक्रिय हुआ और उन्होंने फोन का उपयोग शुरू किया, तभी उनके मोबाइल पर बैंक खाते से पैसे निकाले जाने के कई संदेश आने लगे।

इन मैसेज को देखकर उनके होश उड़ गए। उन्हें समझ नहीं आया कि आखिर उनके खाते से पैसे कैसे निकल सकते हैं। घबराहट में वह तुरंत बैंक पहुंचे और खाते की पूरी जानकारी हासिल की। जांच के दौरान पता चला कि उनके बैंक खाते से कुल 4.50 लाख रुपये निकाले जा चुके हैं।

यह जानकारी मिलते ही उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। एक मोबाइल चोरी की घटना कुछ ही समय में लाखों रुपये की साइबर ठगी में बदल चुकी थी।

साइबर थाने में दर्ज कराया गया मामला

बैंक खाते से पैसे गायब होने की पुष्टि होने के बाद धीरज कुमार ने साइबर थाने में भी शिकायत दर्ज कराई। अब पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अपराधियों ने मोबाइल चोरी करने के बाद बैंक खाते तक पहुंच कैसे बनाई और रकम निकालने में कौन-कौन से तरीके अपनाए।

साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि मोबाइल फोन में मौजूद बैंकिंग ऐप्स, ओटीपी, सहेजे गए पासवर्ड या अन्य डिजिटल जानकारी का दुरुपयोग कर अपराधी इस तरह की घटनाओं को अंजाम देते हैं। इसलिए मोबाइल चोरी की घटनाएं अब केवल सामान्य चोरी नहीं बल्कि संभावित साइबर अपराध भी बन चुकी हैं।

पटना जंक्शन के आसपास सक्रिय हैं ऐसे गिरोह

पुलिस सूत्रों के अनुसार पटना जंक्शन और उसके आसपास कुछ ऐसे गिरोह सक्रिय होने की आशंका है जो लोगों के मोबाइल फोन चोरी करने के बाद उसमें मौजूद संवेदनशील जानकारियों का उपयोग करते हैं। इन गिरोहों का मुख्य उद्देश्य केवल मोबाइल बेचना नहीं, बल्कि उससे आर्थिक लाभ कमाना होता है।

ऐसे अपराधी मोबाइल हाथ लगते ही बैंकिंग और डिजिटल वॉलेट से जुड़ी जानकारियां हासिल करने की कोशिश करते हैं। कई बार वे सिम कार्ड का दुरुपयोग करके ओटीपी प्राप्त कर लेते हैं और फिर बैंक खातों तक पहुंच बना लेते हैं। यही कारण है कि मोबाइल चोरी के मामलों में अब आर्थिक अपराध का खतरा पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है।

पहले भी पकड़ा जा चुका है ऐसा गिरोह

पटना पुलिस इससे पहले भी ऐसे ही एक गिरोह का खुलासा कर चुकी है। जानकारी के अनुसार कुछ समय पहले राजा बाजार स्थित एक रेस्ट हाउस से नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया था। उन पर मोबाइल चोरी और बैंक खातों से अवैध निकासी करने का आरोप था।

हालांकि बाद में गिरफ्तार किए गए आरोपियों को जमानत मिल गई थी। अब हालिया घटनाओं के बाद पुलिस को आशंका है कि इसी तरह के संगठित गिरोह दोबारा सक्रिय हो सकते हैं। इस वजह से पुलिस इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रही है।

मोबाइल चोरी होने पर क्या करें?

इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि मोबाइल फोन की सुरक्षा आज बैंक खाते की सुरक्षा से भी जुड़ी हुई है। यदि किसी व्यक्ति का मोबाइल चोरी हो जाए या गुम हो जाए, तो उसे तुरंत कुछ जरूरी कदम उठाने चाहिए।

सबसे पहले सिम कार्ड को ब्लॉक करवाना बेहद जरूरी है ताकि कोई भी व्यक्ति ओटीपी या अन्य संदेश प्राप्त न कर सके। इसके बाद बैंक को सूचना देकर इंटरनेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग सेवाओं को अस्थायी रूप से बंद करवाना चाहिए।

इसके साथ ही साइबर हेल्पलाइन और स्थानीय पुलिस स्टेशन में तुरंत शिकायत दर्ज कराना भी आवश्यक है। जितनी जल्दी कार्रवाई की जाएगी, नुकसान को रोकने की संभावना उतनी ही अधिक होगी।

लोगों को सतर्क रहने की जरूरत

डिजिटल लेनदेन के बढ़ते दौर में साइबर अपराध भी तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में हर व्यक्ति को अपने मोबाइल और बैंकिंग जानकारी को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी। मोबाइल में बैंकिंग पासवर्ड, यूपीआई पिन या संवेदनशील जानकारी को खुला छोड़ना जोखिम भरा साबित हो सकता है।

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विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि फोन में मजबूत स्क्रीन लॉक, बायोमेट्रिक सुरक्षा और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का उपयोग करना चाहिए। इसके अलावा नियमित रूप से बैंक खाते की गतिविधियों पर नज़र रखना भी ज़रूरी है।

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