PMCH: जब कोई परिवार अपने बीमार सदस्य को लेकर अस्पताल पहुंचता है, तो उसके मन में सिर्फ एक उम्मीद होती है कि मरीज को सही इलाज मिल जाए और उसकी जान बच जाए। लेकिन सोचिए, अगर उसी मुश्किल घड़ी में कोई इंसान मदद का भरोसा देकर ठगी कर ले, तो उस परिवार पर क्या बीतती होगी। ऐसा ही एक मामला बिहार की राजधानी पटना के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शामिल PMCH यानी पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल से सामने आया है, जहां इलाज और भर्ती कराने के नाम पर मरीज के परिजनों से 17 हजार रुपये ठग लिए गए।
यह घटना सिर्फ पैसों की ठगी नहीं है, बल्कि उस भरोसे को तोड़ने वाली घटना है जिसके सहारे लोग दूर-दराज के इलाकों से बड़े अस्पतालों तक पहुंचते हैं। बताया जा रहा है कि पीड़ित परिवार सुपौल से इलाज कराने के लिए पटना आया था। परिवार पहले से ही मरीज की हालत को लेकर परेशान था और उसी चिंता का फायदा उठाकर एक कथित दलाल ने खुद को अस्पताल से जुड़ा व्यक्ति बताया और इलाज में मदद करने का भरोसा दिया।
इलाज दिलाने के नाम पर रची गई ठगी की पूरी कहानी
मिली जानकारी के अनुसार मरीज के परिजन जब PMCH पहुंचे, तब अस्पताल की भीड़ और इलाज की प्रक्रिया को लेकर काफी परेशान थे। इसी दौरान एक व्यक्ति उनसे मिला और खुद को अस्पताल से जुड़ा कर्मचारी या मददगार बताने लगा। उसने भरोसा दिलाया कि वह मरीज को जल्दी भर्ती करा देगा और इलाज में किसी तरह की परेशानी नहीं होने देगा। मुश्किल समय में अक्सर लोग ऐसे लोगों की बातों पर जल्दी भरोसा कर लेते हैं। पीड़ित परिवार ने भी उस व्यक्ति पर विश्वास कर लिया।

आरोप है कि उसने भर्ती और इलाज के नाम पर धीरे-धीरे करीब 17 हजार रुपये ले लिए। परिवार को लग रहा था कि अब मरीज का इलाज जल्द शुरू हो जाएगा, लेकिन कुछ समय बाद वह व्यक्ति अचानक गायब हो गया। जब काफी देर तक वह वापस नहीं आया और उसका कोई पता नहीं चला, तब परिजनों को एहसास हुआ कि उनके साथ ठगी हो चुकी है। यह समझते ही परिवार के लोगों के होश उड़ गए क्योंकि वे इलाज की उम्मीद लेकर आए थे, लेकिन यहां उनके साथ धोखा हो गया।
अस्पताल प्रशासन के सामने आया मामला
घटना की जानकारी सामने आने के बाद PMCH प्रशासन हरकत में आया। अस्पताल अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने मामले को गंभीरता से लिया और पीड़ित परिवार की मदद के लिए पहल की। उनके निर्देश पर परिजनों ने पीरबहोर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई।
बताया जा रहा है कि अस्पताल प्रशासन अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि आखिर आरोपी कौन था और वह अस्पताल परिसर में किस तरह लोगों को अपना शिकार बना रहा था। प्रशासन का कहना है कि मरीजों और उनके परिजनों की सुरक्षा और भरोसा सबसे जरूरी है और ऐसे मामलों को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पुलिस जांच में जुटी, आरोपी की तलाश जारी
एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पीरबहोर थाना पुलिस अस्पताल परिसर और आसपास लगे CCTV कैमरों की मदद से आरोपी की पहचान करने की कोशिश कर रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपी तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। ऐसे मामलों में अक्सर यह देखा जाता है कि कुछ लोग अस्पताल की भीड़ और मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाकर खुद को कर्मचारी या एजेंट बताने लगते हैं। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि कहीं आरोपी किसी बड़े गिरोह का हिस्सा तो नहीं है।
सरकारी अस्पतालों में दलालों का बढ़ता खतरा
यह पहली बार नहीं है जब किसी सरकारी अस्पताल में दलालों की सक्रियता की खबर सामने आई हो। बड़े अस्पतालों में हर दिन हजारों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनमें कई लोग गांवों और छोटे शहरों से आते हैं जिन्हें अस्पताल की प्रक्रिया की ज्यादा जानकारी नहीं होती। यही वजह है कि कुछ गलत लोग उनकी मजबूरी का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं।
ऐसे दलाल मरीजों के परिजनों को जल्दी भर्ती, अच्छे इलाज या डॉक्टर से तुरंत मुलाकात कराने का लालच देकर पैसे ऐंठते हैं। कई बार लोग डर और जल्दबाजी में उनकी बातों में आ जाते हैं। यही कारण है कि अस्पताल प्रशासन और पुलिस बार-बार लोगों को सतर्क रहने की सलाह देते हैं।
परिजनों के लिए सबसे मुश्किल होता है भरोसा टूटना
किसी भी परिवार के लिए सबसे कठिन समय वह होता है जब उनका कोई अपना अस्पताल में जिंदगी और मौत से लड़ रहा हो। ऐसे समय में लोग मानसिक और आर्थिक दोनों तरह से परेशान होते हैं। अगर उसी दौरान कोई ठगी कर ले, तो यह दर्द और भी ज्यादा बढ़ जाता है। सुपौल से आए इस परिवार के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। वे अपने मरीज के इलाज की उम्मीद लेकर पटना पहुंचे थे, लेकिन यहां उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक परेशानी का भी सामना करना पड़ा।
लोगों को सतर्क रहने की जरूरत

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि अस्पतालों में आने वाले लोगों की सुरक्षा और जागरूकता को लेकर और ज्यादा सख्ती की जरूरत है। विशेषज्ञों का कहना है कि मरीजों और उनके परिजनों को किसी भी अनजान व्यक्ति पर भरोसा नहीं करना चाहिए। अस्पताल से जुड़ी हर जानकारी आधिकारिक काउंटर या कर्मचारियों से ही लेनी चाहिए। अगर कोई व्यक्ति पैसे मांगता है या खुद को अस्पताल से जुड़ा बताकर मदद का दावा करता है, तो उसकी जानकारी तुरंत प्रशासन को देनी चाहिए।
Disclaimer: यह लेख उपलब्ध समाचार रिपोर्ट्स और सामने आई जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। मामले की जांच फिलहाल जारी है और पुलिस की जांच के बाद नई जानकारी सामने आ सकती है। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक बयान और जांच रिपोर्ट का इंतजार करना जरूरी है।
Also Read:










