Patna Ayurvedic College का शताब्दी समारोह होगा ऐतिहासिक, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को बुलाने की तैयारी शुरू

On: May 12, 2026 12:13 PM
Patna Ayurvedic College

Patna Ayurvedic College: पटना का आयुर्वेदिक कॉलेज और अस्पताल सिर्फ एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि बिहार की चिकित्सा परंपरा और इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। दशकों से यह संस्थान आयुर्वेदिक शिक्षा और उपचार के क्षेत्र में अपनी खास पहचान बनाए हुए है। अब जब यह कॉलेज अपने 100 वर्ष पूरे करने जा रहा है, तो पूरे संस्थान में एक अलग उत्साह और गर्व का माहौल देखने को मिल रहा है। शताब्दी समारोह को भव्य और यादगार बनाने की तैयारियां अभी से शुरू हो चुकी हैं।

26 जुलाई 2026 को आयोजित होने वाले इस खास समारोह को लेकर कॉलेज प्रशासन कई बड़े कदम उठा रहा है। सबसे बड़ी चर्चा इस बात की हो रही है कि कार्यक्रम में देश की राष्ट्रपति Droupadi Murmu को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने की तैयारी की जा रही है। इस प्रस्ताव को स्वास्थ्य विभाग के पास भेज दिया गया है और विभाग के माध्यम से औपचारिक निमंत्रण भेजे जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

100 साल पूरे होने पर होगा भव्य आयोजन

Patna Ayurvedic College
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किसी भी संस्थान के लिए 100 वर्ष पूरे करना सिर्फ एक उपलब्धि नहीं, बल्कि उसकी मजबूत विरासत और समाज में योगदान का प्रमाण होता है। Patna Ayurvedic College ने इन वर्षों में हजारों छात्रों को शिक्षा दी और आयुर्वेदिक चिकित्सा के क्षेत्र में अपनी अहम भूमिका निभाई। कॉलेज प्रशासन चाहता है कि यह शताब्दी समारोह ऐसा हो जिसे आने वाले वर्षों तक याद रखा जाए। इसी वजह से कार्यक्रम की तैयारियां काफी पहले से शुरू कर दी गई हैं। कॉलेज परिसर में विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम, चिकित्सा संगोष्ठियां और ऐतिहासिक प्रदर्शनी जैसे आयोजन भी किए जा सकते हैं।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को बुलाने की तैयारी

इस समारोह को राष्ट्रीय स्तर पर खास पहचान दिलाने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को आमंत्रित करने की योजना बनाई गई है। कॉलेज प्रशासन ने इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग को प्रस्ताव भेजा है। अगर राष्ट्रपति इस कार्यक्रम में शामिल होती हैं, तो यह संस्थान के लिए बेहद गर्व और सम्मान की बात होगी। ऐसे बड़े कार्यक्रम में राष्ट्रपति की मौजूदगी न सिर्फ कॉलेज की प्रतिष्ठा बढ़ाएगी, बल्कि आयुर्वेदिक शिक्षा और पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को भी राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल सकती है।

शताब्दी वर्ष पर जारी हो सकता है विशेष डाक टिकट

कॉलेज प्रशासन इस ऐतिहासिक मौके को और खास बनाने के लिए विशेष डाक टिकट जारी करने की भी तैयारी कर रहा है। यह कदम संस्थान की विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान देने जैसा माना जा रहा है।

जब किसी संस्थान के नाम पर डाक टिकट जारी होता है, तो वह सिर्फ एक प्रतीक नहीं रहता बल्कि इतिहास का हिस्सा बन जाता है। इससे आने वाली पीढ़ियां भी उस संस्थान की उपलब्धियों और योगदान को याद रखती हैं। कॉलेज की प्राचार्य डॉ. उमा पांडेय ने बताया कि शताब्दी वर्ष को यादगार बनाने के लिए कई योजनाओं पर काम चल रहा है।

संस्थान के गौरवशाली इतिहास को किया जाएगा याद

Patna Ayurvedic College का इतिहास काफी समृद्ध माना जाता है। कॉलेज प्रशासन के अनुसार इस संस्थान की स्थापना भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति Sarvepalli Radhakrishnan ने की थी। यह बात खुद इस संस्थान की ऐतिहासिक अहमियत को दर्शाती है। इसके अलावा बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री Nitish Kumar के पिता भी इस कॉलेज के छात्र रह चुके हैं। यही कारण है कि यह संस्थान बिहार के सामाजिक और शैक्षणिक इतिहास से भी गहराई से जुड़ा हुआ माना जाता है।

शताब्दी समारोह के दौरान कॉलेज के पुराने दस्तावेज, तस्वीरें और उपलब्धियों को प्रदर्शित करने की भी योजना बनाई जा रही है ताकि लोग इसके गौरवशाली सफर को करीब से जान सकें।

आयुर्वेदिक शिक्षा में जुड़ सकता है नया अध्याय

कॉलेज प्रशासन सिर्फ समारोह तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि भविष्य की योजनाओं पर भी तेजी से काम कर रहा है। वर्तमान में यहां 14 पीजी कोर्स संचालित हो रहे हैं, लेकिन अब 15वां नया पाठ्यक्रम शुरू करने की तैयारी की जा रही है।

इसके तहत “डिपार्टमेंट ऑफ इंटीग्रेटेड हेल्थ एंड ट्रांसलेशनल रिसर्च” शुरू करने की योजना बनाई गई है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग को अनुमति संबंधी प्रस्ताव भी भेजा जा चुका है। अगर यह विभाग शुरू होता है, तो यह आयुर्वेदिक शिक्षा और शोध के क्षेत्र में बड़ा कदम माना जाएगा।

आधुनिक और पारंपरिक चिकित्सा को जोड़ने की पहल

नई योजना का सबसे खास हिस्सा यह है कि इसमें आधुनिक चिकित्सा और पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को साथ जोड़ने की कोशिश की जाएगी। आज के समय में लोग holistic treatment की तरफ तेजी से आकर्षित हो रहे हैं, जहां शरीर और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर ध्यान दिया जाता है। प्राचार्य डॉ. उमा पांडेय के अनुसार इस नए विभाग के जरिए आयुर्वेद, योग और अन्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों से जुड़ी रिसर्च को व्यावहारिक उपचार में शामिल करने पर काम होगा। यह पहल भविष्य में मरीजों के लिए अधिक प्रभावी और संतुलित उपचार प्रणाली विकसित करने में मददगार साबित हो सकती है।

बिहार में आयुर्वेदिक शिक्षा को मिल सकती है नई पहचान

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Patna Ayurvedic College का शताब्दी समारोह सिर्फ एक संस्थान का उत्सव नहीं होगा, बल्कि यह बिहार में आयुर्वेदिक शिक्षा की बढ़ती अहमियत को भी दर्शाएगा। पिछले कुछ वर्षों में लोग प्राकृतिक और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की ओर फिर से रुचि दिखाने लगे हैं। ऐसे में यह संस्थान नई रिसर्च, आधुनिक तकनीक और पारंपरिक ज्ञान को एक साथ जोड़कर देशभर में अपनी नई पहचान बना सकता है।

Disclaimer: यह लेख उपलब्ध जानकारी और मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार किया गया है। कार्यक्रम, अतिथियों की उपस्थिति और अन्य योजनाओं में समय के अनुसार बदलाव संभव हैं। किसी भी आधिकारिक जानकारी के लिए संबंधित विभाग और संस्थान की आधिकारिक घोषणा को ही अंतिम मानें।

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