नारी शक्ति बिल पर गरजे CM Samrat: अपने घर की महिलाएं सांसद, आम बेटियों को क्यों नहीं मौका?

On: April 19, 2026 5:26 PM
CM Samrat

CM Samrat: राजनीति में जब महिलाओं की भागीदारी की बात होती है, तो देश की करोड़ों बेटियों की उम्मीदें जाग उठती हैं। हर परिवार चाहता है कि उसकी बेटी भी आगे बढ़े, समाज में नाम कमाए और नेतृत्व करे। लेकिन जब अवसर सिर्फ कुछ चुनिंदा परिवारों तक सीमित रह जाएं, तब सवाल उठना स्वाभाविक है। बिहार की राजनीति में रविवार को ऐसा ही एक तीखा बयान सुनने को मिला, जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विपक्षी दलों पर खुलकर निशाना साधा।

पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर विपक्षी दलों की राजनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कुछ पार्टियां महिलाओं के आरक्षण की बात तो करती हैं, लेकिन मौका सिर्फ अपने परिवार की महिलाओं को देती हैं। आम घरों की बेटियों को आगे बढ़ाने की बात सिर्फ भाषणों तक सीमित रह जाती है।

उनके इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में नया माहौल बन गया है। महिलाओं की भागीदारी, परिवारवाद और आरक्षण को लेकर बहस फिर तेज हो गई है।

पटना से उठी तेज राजनीतिक आवाज

रविवार 19 अप्रैल को पटना के अटल सभागार में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी काफी आक्रामक नजर आए। उन्होंने विपक्षी गठबंधन के प्रमुख दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि राजनीति में महिलाओं के नाम पर सिर्फ दिखावा किया गया है।

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उन्होंने सवाल किया कि जब महिलाओं को बराबरी का अधिकार देने की बात होती है, तो फिर टिकट और पद सिर्फ खास परिवारों तक ही क्यों सीमित रहते हैं। उनका कहना था कि अगर सच्चे अर्थों में नारी सम्मान चाहिए, तो गांव, गरीब और सामान्य परिवारों की बेटियों को भी अवसर मिलना चाहिए।

परिवारवाद पर सीधा हमला

CM Samrat ने अपने बयान में उन राजनीतिक दलों का नाम लेते हुए कहा कि कुछ पार्टियों में सिर्फ घर की महिलाएं ही संसद और विधानसभा तक पहुंचती हैं। आम कार्यकर्ता की बेटी या सामान्य परिवार की महिला को आगे बढ़ने का मौका नहीं मिलता।

उन्होंने कहा कि राजनीति लोकतंत्र का मंच है, न कि पारिवारिक विरासत का साधन। अगर कोई पार्टी सच में महिलाओं का सम्मान करती है, तो उसे हर वर्ग की महिलाओं के लिए दरवाजे खोलने चाहिए।

उनका यह बयान सीधे तौर पर परिवारवाद के मुद्दे को सामने लाता है, जो भारतीय राजनीति में लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर जोर

CM Samrat ने प्रेस वार्ता में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह कानून सिर्फ कागज का फैसला नहीं, बल्कि करोड़ों महिलाओं के सपनों से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी केवल प्रतीकात्मक न रहे, बल्कि वास्तविक रूप में बढ़े। अगर पंचायत से संसद तक महिलाओं को बराबरी का मौका मिलेगा, तभी देश आगे बढ़ेगा।

आम बेटियों की उम्मीदों का सवाल

CM Samrat के बयान में सबसे ज्यादा जोर इस बात पर था कि राजनीति में सिर्फ बड़े घरानों की महिलाओं का चेहरा क्यों दिखता है। देश और बिहार में लाखों प्रतिभाशाली लड़कियां हैं, जो पढ़ी-लिखी हैं, मेहनती हैं और नेतृत्व क्षमता रखती हैं। लेकिन जब टिकट वितरण और पदों की बात आती है, तो उन्हें पीछे छोड़ दिया जाता है।

यही वजह है कि उनके बयान ने आम परिवारों की बेटियों की उम्मीदों को भी आवाज दी है।

विपक्ष पर क्या असर पड़ेगा

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि ऐसे बयान चुनावी माहौल में बड़ा असर डाल सकते हैं। महिलाओं की आबादी हर चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाती है। ऐसे में महिलाओं के अधिकार, प्रतिनिधित्व और सम्मान जैसे मुद्दे बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

अगर यह बहस आगे बढ़ती है, तो विपक्षी दलों पर भी महिलाओं को ज्यादा टिकट देने और नए चेहरों को सामने लाने का दबाव बन सकता है।

बिहार की राजनीति में महिला शक्ति

बिहार में पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ी है। पंचायत स्तर पर महिलाओं को आरक्षण मिलने से हजारों महिलाएं नेतृत्व में आईं। इससे समाज में बदलाव की नई तस्वीर देखने को मिली।

अब सवाल विधानसभा और संसद की राजनीति का है, जहां अब भी महिलाओं की संख्या सीमित है। यही मुद्दा नारी शक्ति बिल को और महत्वपूर्ण बनाता है।

जनता क्या सोच रही है

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आम लोगों के बीच भी यह सवाल अक्सर उठता है कि राजनीति में नए चेहरे क्यों कम दिखते हैं। लोग चाहते हैं कि मेहनती, ईमानदार और जमीनी महिलाएं भी राजनीति में आगे आएं। सम्राट चौधरी का बयान इसी भावना को छूता हुआ नज़र आता है। उन्होंने सीधे कहा कि मौका सबको मिलना चाहिए, सिर्फ खास परिवारों को नहीं।

Disclaimer: यह लेख उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें व्यक्त राजनीतिक बयान संबंधित नेताओं के हैं। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी विषय पर अंतिम राय बनाने से पहले आधिकारिक बयान और विश्वसनीय स्रोतों की जानकारी जरूर देखें।

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